Kalpana Vishwa Main ( Hindi)

कल्पना विश्व में

तुम्हारे आने का इंतज़ार
तुम्हारे आने से कितना अच्छा है।

हर पल एक उल्हास, एक उत्कंठा है मन में
तुम आओगे तो बहार आये जीवन मे

पल पल रात दीन बीत जाते हैं
रोमांच और व्याकुलता से
एक सिहरन एक मीठी सी कसक उठती है
बस ये सोचने से
तुम आओगे, तुम्हारे आने से
फिर जी उठुंगी मै।

तुम क्या बोलोगे, कैसे हंसोगे,
कैसी आंखे चमक उठेंगी तुम्हारी
मुझे देखकर
क्या कहकर बुलाओगे
चिढ़ाओगे, उलझाओगे अपनी बातों में
तकते हुए अपलक नैन तुम्हारे
क्या कुछ कह जाएंगे !

मेरा मन कितने इंद्रधनुषी रंग भर देता है
उस छोटे से पल में
एक जीवन पूरा समेट देता है उन चंद क्षणों में

आशाओंके पंछी, सपनों की तितलियां, खुशी के फूल, अनगिनत गुलाबों की खुशबू;
उज्वल किरणों से दमकती हुई राहें जिन पर तुम चल कर आओगे
वह प्रतीक्षा कितनी मनभावन , आशाओं से भरी, कितनी लुभावनी होती है
हमारा रिश्ता उन उम्मीद से भरे क्षणों में जितना गहरा होता है,
अन्य और कभी नहीं होता ।
मेरे कल्पना विश्व में लहराते हुए उन सतरंगी उजाले की जानिब
तुम्हारा वजूद हावी हो जाता है तन और मन पर।

पर कल्पना हमेशा सत्य से ज्यादा रूपवान होती है, है ना?
जिस प्रतीक्षा में मैंने इतने सुंदर सपनों के महल सजाएं है, क्या सत्य में वहीं सब होगा?
पर ये सब ऐसा होगा ना?
की विचार की दुनिया से सच्चाई की दुनिया में आते आते कुछ टूट तो नहीं जाएगा?

इस से तो बेहतर है तुम आओ ही ना
बेहतर तो ये है कि सपनों की दुनिया वैसी ही अबाधित रहे ।

या फिर कुछ ऐसा हो के सच की दुनिया को पीछे छोड़ कर
तुम्हारा हाथ हाथ में लिए
कल्पना की सुंदर दुनिया में हम खो जाए।

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