Prateeksha ( Hindi)
प्रतीक्षा
इस जमीन से सटकर जीना है मुझे !
तुम तो आसमानी परिंदे होनील गगन की चाह खींचती है तुम्हे
उन्मुक्त हिलोरे लेकर भटकना है तुम्हे
मेरा यहीं जहां, इस मिट्टी से है प्यार मुझे
पग धरकर इसमें मुझे जमीन से जुड़ने दो
आकाश की कोई थाह नहीं
मुझको इसकी चाह नहीं
मै जुड़ी हुई हूं इस धरा से
गर्भवती काली मृदा से
उड़ कर चाहे जाऊ जहां भी
आना वापस तो है यहां ही
मुझको इस के संग रहने दो
तुम आसमान लो जाकर छु लो।
बादल बिजली तारे साथ तुम्हारे
पवन पुरवाई राह तुम्हारे
चहको महको ले लो उड़ान
आसरे का किन्तु बस एक ही स्थान
वह आसरा बन कर ठहरने दो
मुझ को जमीन से सटकर जीने दो
तुम देखो रंगीन सपने
हो तो तुम भी मेरे अपने
मेरे अपने तुम्हारे सपने
जाओ जाकर उन्हें थाम लो
डरो नहीं, ये मेरी बांह लो
इस छोटे सहारे के सहारे
उन्मुक्त खुला गगन तुम्हे पुकारे
निकल पडों तुम, उछल पड़ों तुम
जब भी वापस आना है मुड़
मैं खड़ी हूं अचल अटल धरा पर
सम्हाले हुए तुम्हारी जड़.
आखिर आना है धरती पर
थक जाओ जब उड़ान भर कर
प्रतीक्षा तुम्हारी है तब तक
प्रतीक्षा तुम्हारी है तब तक।।
Yes....pratiksha toh karna hai.....
ReplyDeleteGood flow of thoughts and very apt!
Thank you.
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